नेपाली जन आक्रोश से मिलता सबक: लोकतंत्र, युवा असंतोष और सुशासन की चुनौती
DOI:
https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i3.22Keywords:
नेपाल, जन आक्रोश, युवा आंदोलन, लोकतंत्र, सुशासन, भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता, राजनीतिक उत्तरदायित्व, दक्षिण एशिया, सामाजिक माध्यम।Abstract
सितंबर 2025 में नेपाल में उभरा युवा-नेतृत्व वाला जन आंदोलन समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने उपस्थित अनेक गंभीर प्रश्नों को रेखांकित करता है। 4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार द्वारा 26 सामाजिक माध्यम मंचों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन व्यापक रूप लेने लगे। यद्यपि सामाजिक माध्यमों पर प्रतिबंध तत्काल कारण बना, किंतु आंदोलन की पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षणवाद, आर्थिक असमानता, रोजगार के सीमित अवसर तथा शासन की जवाबदेही से संबंधित लंबे समय से निर्मित असंतोष भी मौजूद था। 8 सितंबर को सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। इसके अगले दिन हिंसा, आगजनी तथा सरकारी और निजी संपत्तियों पर हमले हुए। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दिया और नेपाल में अंतरिम राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई। प्रस्तुत आलेख नेपाली जन आक्रोश को केवल एक तात्कालिक राजनीतिक घटना के रूप में न देखकर लोकतांत्रिक शासन, नागरिक आकांक्षाओं, सामाजिक-आर्थिक असमानता और सुशासन की व्यापक चुनौतियों के संदर्भ में समझने का प्रयास करता है। इसका केंद्रीय तर्क यह है कि लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव, संसद और राजनीतिक दलों की उपस्थिति से निर्धारित नहीं होती, बल्कि नागरिक गरिमा, समान अवसर, पारदर्शिता, सामाजिक न्याय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही से भी निर्धारित होती है। नेपाल का अनुभव दक्षिण एशिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए यह प्रश्न उपस्थित करता है कि यदि राजनीतिक संस्थाएं जनता की आकांक्षाओं से निरंतर दूर होती जाएं तो उनके प्रति विश्वास और वैधता कमजोर हो सकती है। भारत के संदर्भ में भी आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सामाजिक विभाजन और सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति विश्वास जैसे प्रश्नों पर गंभीर विमर्श आवश्यक है। अतः नेपाली अनुभव का प्रमुख संदेश यह है कि जन असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानने के बजाय उसके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों को समझना तथा समय रहते संस्थागत सुधार करना आवश्यक है।
