भाषाई कौशलों की वर्तमान प्रासंगिकता और कक्षा शिक्षण में उनकी उपयोगिता का विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i4.33Keywords:
बीज बिंदु: भाषाईकौशल, डिजिटलसाक्षरता, सक्रियश्रवण, गतिविधि-आधारितशिक्षण, NEP 2020, कौशल-आधारितमूल्यांकनAbstract
सारांश
वर्तमान 'सूचना विस्फोट' और डिजिटल क्रांति के युग में, भाषा केवल संवाद का साधन न रहकर एक अनिवार्य जीवन कौशल बन गई है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में श्रवण, भाषण, वाचन और लेखन कौशल किस प्रकार विद्यार्थी के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास को प्रभावित करते हैं। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि आधुनिक कक्षा शिक्षण अब पारंपरिक व्याख्यान पद्धतियों से हटकर गतिविधि-आधारित और छात्र-केंद्रित हो गया है, जहाँ स्मार्ट क्लास और भाषाई प्रयोगशालाओं जैसे डिजिटल उपकरणों की भूमिका बढ़ गई है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि २१वीं सदी की चुनौतियों, जैसे डिजिटल भटकाव और सूचनाओं की सत्यता की पहचान, का सामना करने के लिए भाषाई दक्षता और डिजिटल साक्षरता का समन्वय अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, बहुभाषिकता को संसाधन के रूप में अपनाना और रटने के बजाय कौशल-आधारित मूल्यांकन पद्धति को लागू करना ही भविष्य के सक्षम नागरिकों को गढ़ने का एकमात्र मार्ग है।
