नवाचारी शिक्षण पद्धति को बढ़ावा देने में राष्ट्रिय शिक्षा निति-2020 की भूमिका
DOI:
https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i3.20Keywords:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, नवाचारी शिक्षण पद्धति, अनुभवात्मक अधिगम, प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा, गेमिफिकेशन, माइक्रोलर्निंग, शैक्षणिक नवाचार।Abstract
भारत की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, समावेशन और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रस्तुत राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी दस्तावेज़ है। यह नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली को ऐसी दिशा प्रदान करती है जो केवल ज्ञान-संप्रेषण पर आधारित पारंपरिक शिक्षण से आगे बढ़कर अनुभवाधारित, कौशल-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संवर्धित अधिगम की ओर उन्मुख है। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य शिक्षार्थियों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान और जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करना है। इस शोध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 द्वारा प्रस्तावित नवाचारी शिक्षण पद्धतियों जैसे अनुभवात्मक अधिगम, परियोजना-आधारित अधिगम, बहुविषयक एवं समेकित शिक्षा, प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षण, गेमिफिकेशन, माइक्रोलर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग की समीक्षा प्रस्तुत की गई है। अध्ययन का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि NEP-2020 विद्यालय एवं उच्च शिक्षा स्तर पर इन नवाचारी पद्धतियों को अपनाने के लिए किस प्रकार संरचनात्मक, नीतिगत एवं व्यावहारिक अवसर प्रदान करती है। शोध के माध्यम से यह ज्ञात किया जाएगा कि शिक्षकों, विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों में इस नीति के कार्यान्वयन की वास्तविक स्थिति क्या है। साथ ही यह भी मूल्यांकित किया जाएगा कि इन नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने में कौन-सी चुनौतियाँ सामने आती हैं जैसे शिक्षक प्रशिक्षण की कमी, संसाधनों का अभाव, पारंपरिक दृष्टिकोण की जड़ता और इनके समाधान हेतु कौन-सी संभावनाएँ मौजूद हैं। यह अध्ययन शिक्षा के क्षेत्र में नीति और व्यवहार के बीच की कड़ी को स्पष्ट करेगा तथा यह दर्शाएगा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 किस प्रकार भारत की शिक्षा प्रणाली को नवाचार, समावेशन और गुणवत्ता की दिशा में रूपांतरित कर रही है। यह नीति शिक्षण को पारंपरिक पद्धति से आगे बढ़ाकर अनुभवात्मक, कौशल-आधारित और प्रौद्योगिकी-संवर्धित बनाती है। नीति में शिक्षक को मार्गदर्शक और विद्यार्थी को सक्रिय सहभागी के रूप में देखने की दृष्टि विकसित की गई है। NETF, RIF और बहुभाषिकता जैसे प्रावधानों से नवाचार को संस्थागत स्वरूप मिला है। परिणामस्वरूप राष्ट्रित शिक्षा निति अधिक रचनात्मक, लचीली और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बन रही है।
