राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन सुधार एवं दक्षता-आधारित अधिगम: विकसित भारत 2047 की दिशा में एक बहुविषयक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i3.21Keywords:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मूल्यांकन सुधार, दक्षता-आधारित अधिगम, विकसित भारत 2047, समग्र मूल्यांकन, अनुभवात्मक अधिगम।Abstract
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक एवं परिवर्तनकारी सुधारों का आधार प्रस्तुत करती है। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल विषयगत ज्ञान का विकास करना नहीं, बल्कि उनमें आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान, नवाचार, सृजनात्मकता, नैतिकता, संचार-कौशल तथा जीवन-कौशल जैसी 21वीं सदी की आवश्यक दक्षताओं का विकास करना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए नीति में मूल्यांकन प्रणाली को पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से हटाकर दक्षता-आधारित, सतत एवं समग्र मूल्यांकन प्रणाली अपनाने पर बल दिया गया है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में मूल्यांकन सुधार एवं दक्षता-आधारित अधिगम की अवधारणा का विश्लेषण करना तथा विकसित भारत 2047 के निर्माण में इसकी भूमिका का अध्ययन करना है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि पारंपरिक रटंत शिक्षा विद्यार्थियों के वास्तविक ज्ञान, कौशल तथा व्यवहारगत दक्षताओं का समुचित मूल्यांकन करने में सक्षम नहीं है। इसके स्थान पर परियोजना कार्य, पोर्टफोलियो, अनुभवात्मक अधिगम, प्रायोगिक गतिविधियाँ, सहपाठी मूल्यांकन, स्व-मूल्यांकन तथा डिजिटल मूल्यांकन जैसी विधियाँ विद्यार्थियों के समग्र विकास को अधिक प्रभावी रूप से सुनिश्चित करती हैं। शोध में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अनुसंधान पद्धति का उपयोग किया गया है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, विभिन्न शोध-पत्रों, पुस्तकों, सरकारी रिपोर्टों एवं शैक्षिक दस्तावेजों का अध्ययन किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि यदि विद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में दक्षता-आधारित अधिगम एवं मूल्यांकन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो शिक्षार्थियों में आत्मनिर्भरता, नवाचार, नेतृत्व क्षमता, रोजगारपरक कौशल तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास होगा, जो विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। अतः आवश्यक है कि शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल अवसंरचना, पाठ्यचर्या सुधार तथा सतत मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ बनाकर शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए।
