बिहार के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की नौकरी की संतुष्टि बढ़ाने में आईसीटी की भूमिका

लेखक

  • डॉ0 अरविन्द कुमार असि0 प्रोफेसर, प्रतिक कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सिवान, बिहार ##default.groups.name.author##

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आईसीटी, नौकरी की संतुष्टि, प्राथमिक विद्यालय, शिक्षक, शिक्षणदृअधिगम प्रक्रिया, व्यावसायिक विकास, प्रशासनिक सहयोग, डिजिटल संसाधन

सार

वर्तमान डिजिटल युग में आईसीटी ने शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न आयामों को प्रभावित किया है, विशेष रूप से शिक्षणदृअधिगम प्रक्रिया, प्रशासनिक कार्यों तथा व्यावसायिक विकास के क्षेत्र में। प्राथमिक विद्यालयों में आईसीटी के प्रयोग से शिक्षकों के कार्यभार, शिक्षण प्रभावशीलता एवं पेशेवर आत्मविश्वास में परिवर्तन दृष्टिगत होता है, जो उनकी नौकरी की संतुष्टि से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है। नौकरी की संतुष्टि को शिक्षण सुविधा, कार्यभार, प्रशासनिक समर्थन, पेशेवर विकास के अवसर एवं कार्यदृपरिवेश जैसे आयामों के आधार पर मापा गया है। जिन विद्यालयों में आईसीटी संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता, नियमित प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता प्राप्त होती है, वहाँ शिक्षकों की नौकरी की संतुष्टि का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है। आईसीटी शिक्षकों के शिक्षण कार्य को सरल बनाती है, समय प्रबंधन में सहायक होती है तथा नवाचार के अवसर प्रदान करती है। शोध यह संकेत देता है कि यदि बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में आईसीटी अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाए, शिक्षकों को सतत् तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तथा प्रशासनिक स्तर पर तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया जाए, तो शिक्षकों की नौकरी की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है, जो अंततः प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में सहायक सिद्ध होगी।

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प्रकाशित

2026-01-25

अंक

खंड

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