हाईस्कूल स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर शैक्षिक चिंता के प्रभाव का अध्यययन
DOI:
https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i2.7Keywords:
हाईस्कूल स्तर, शैक्षिक उपलब्धि, शैक्षिक चिंताAbstract
21वीं सदी में वैज्ञानिक आविष्कारों एवं दूरसंचार के साधनों की उपलब्धता के कारण प्राचीन एवं मध्यकालीन समाजों के अपेक्षा आधुनिक समाज में प्रतिदिन क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं। जिसके कारण विद्यार्थियों में इस बात को लेकर अनिश्चितता का भाव बना रहता है कि वह इस संक्रांतिकाल को किस प्रकार सफलता पूर्वक पार करके अपने को एक योग्य शिक्षार्थीं सिद्ध व स्थायीकृत करें। किशोरावस्था में बालक की महत्वाकांक्षाएं अतिधिक प्रबल होती है परन्तु विद्यालय में बढ़ता पाठ्क्रम, माता-पिता की अपेक्षायें, अध्यापकों के सामने उत्कृष्ट प्रदर्शन करना, सहपाठियों के बीच अपनी छवि बनाने की चेष्टा तथा स्वयं बालक की उŸाम शैक्षणिक उपलब्धि की आकाक्षां बालक को चिंता ग्रस्त बना देती है। हालांकि चिंता बालक के विकास और अभिवृद्धि के सभी अवस्थाओं में पाया जाता है लेकिन किशोरावस्था के दौरान इसकी प्रबलता अतिधिक प्रबल होती है इस चिंता को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि, आत्म-विश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। किसी भी प्रगतिशील राष्ट्र की समृद्धि उसके विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धियों पर निर्भर करती है। लेकिन वर्तमान समय शिक्षण संस्थान अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक हो गये है जिसके कारण विद्यार्थियों पर अनेक प्रकार के दबाव बढ़ गए हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि में दिन प्रतिदिन ह्मस व शैक्षिक चिंता की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अतः शोधकर्Ÿाा द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र के अंतर्गत इस तथ्य पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है कि क्या हाईस्कूल स्तर के विद्यार्थियांे में होने वाले शैक्षिक चिंता का उनकी शैक्षिक उपलब्धियों पर प्रभाव पडता है कि नहीं, को शोध अध्ययन की समस्या के रूप में चयन किया।
