रोहिलखंड क्षेत्र का भारतीय संस्कृति में सांगीतिक योगदान

लेखक

  • प्रिंस गुप्ता शोधार्थी, संगीत विभाग, वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय, बरेली ##default.groups.name.author##
  • डाॅ. संध्या रानी शाक्य शोध निर्देशिका, संगीत विभाग, वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय, बरेली ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.67185/vimrj.v1i3.19

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भारतीय, परम्परा, सामाजिक, संस्कृति, लोक संगीत, समाज।

सार

सांस्कृतिक विरासत के सर्वांगीण विकास को अपने आंचल में समेटे हुए किसी भी क्षेत्र का लोक-साहित्य वहाँ की अमूल्य धरोवर है। लोक संगीत भारतीय संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। यह आम जनजीवन की भावनाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक अनुभवों की संगीतात्मक अभिव्यक्ति है। लोक संगीत का विकास गाँवों और समुदायों के बीच हुआ, इसलिए इसमें समाज की वास्तविक जीवन शैली की झलक दिखाई देती है। लोक संगीत किसी भी प्रदेश या क्षेत्र का हो, वह सरलता और स्वाभाविकता लिए हुए सरल भाषा और सहज धुनों में होते हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ता रहता है। इसमें क्षेत्र विशेष की भाषा, पहनावा, जीवन शैली और मान्यताओं का वर्णन मिलता है। यह प्रकृति से सम्बन्धित ऋतु, वर्षा, फसल और प्राकृतिक वातावरण से जुड़े गीत तथा भावनाओं जैसे प्रेम, विरह, खुशी, दुख, वीरता भक्ति जैसे भावों से ओत-प्रोत होते हैं। लोक संगीत ने भारत की प्राचीन परम्पराओं, लोककथाओं और रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखा है। संगीत त्योहारों, विवाहों और सामूहिक आयोजनों में लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और सामाजिक एकता को दर्शाता है। लोक संगीत ने भारतीय संगीत को अनेक शैलियाँ धुनें ओर वाद्य परम्पराएँ प्रदान की हैं। लोकसंगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि भारतीय समाज के इतिहास भावनाओं और जीवन मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है। लोकसंगीत भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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प्रकाशित

2026-06-25

अंक

खंड

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